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युक्तियुक्तकरण का फैसला छात्रों के हित में: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

       रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा किया गया युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) का फैसला पूरी तरह से छात्रों के हित में है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन भी दूर होगा।

क्या है युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य?

       मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेशभर में शिक्षक पदस्थापना को लेकर बड़ा असंतुलन है:

  • कई स्कूल शिक्षकविहीन हैं।

  • कई स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं।

  • कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है लेकिन शिक्षक अधिक हैं।

“हमारा उद्देश्य है कि शिक्षक उन स्कूलों में पहुंचे जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है। इस प्रक्रिया से बच्चों को बेहतर पढ़ाई का अवसर मिलेगा।”

 स्कूल बंद होने की आशंका निराधार

       मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • एक ही परिसर में चल रहे दो या तीन स्कूलों का विलय किया जा रहा है।

  • ग्रामीण क्षेत्र में 1 किलोमीटर और शहरी क्षेत्र में 500 मीटर के दायरे में स्थित स्कूलों को एकीकृत किया गया है।

       इस निर्णय से कोई भी विद्यार्थी अपनी पहुँच से बाहर शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

शिक्षकों की होगी भर्ती

       कुछ जगह यह अफवाह फैलाई जा रही है कि युक्तियुक्तकरण से नयी शिक्षक भर्ती नहीं होगी, इस पर मुख्यमंत्री ने कहा:

“यह पूरी तरह गलत है। हमने शिक्षक भर्ती का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा है। अनुमति मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

       उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हर साल चरणबद्ध रूप से शिक्षकों की कमी को पूरा किया जाएगा।

क्या है वर्तमान स्थिति?

  • राज्य में कुल 10,463 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है:

    • ई-संवर्ग: 5,849 शालाएं

    • टी-संवर्ग: 4,614 शालाएं

  • इनमें से 10,297 विद्यालय एक ही परिसर में संचालित थे, जिन्हें अब मर्ज कर दिया गया है।

  • ग्रामीण क्षेत्र में 1 किलोमीटर के भीतर स्थित 133 विद्यालय, और शहरी क्षेत्र में 500 मीटर के भीतर स्थित 33 विद्यालयों को भी युक्तियुक्त किया गया है।

       यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत की जा रही है।

मुख्य लाभ:

  • शिक्षकविहीन स्कूलों में अब अतिशेष शिक्षकों की तैनाती संभव।

  • शिक्षकों का संतुलन और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित।

  • छात्रों को बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी।

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